विश्लेषणात्मक अनुसंधान एवं विकास विभाग (ए. आर. एंड डी) अपने अनुवादणीय और गतिशील अनुसंधान कार्यकलापों के माध्यम से उच्चतम मानक औषधियाँ लाकर आई.पी.सी. के लक्ष्य, और दृष्टिकोण को सुदृढ बनाता है। ए. आर एंड. डी. विभाग लगातार नवीनतम तकनीकी आवश्यकताओं के मुताबिक विश्लेषणात्मक परीक्षण प्रक्रियाओं में बदलाव लाता है।

 विश्लेषणात्मक अनुसंधान एवं विकास विभाग में निम्नलिखित क्षमताएं हैं:

  1. यह विभाग नए मोनोग्राफ के विकास में सक्रिय है तथा भारतीय जनसंख्या द्वारा उपयोग किए जाने वाली दवाओं और दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय भेषजसंहिता के एपीआई, फॉर्मूलेशन और निश्चित-खुराक संयोजनों (फ़िक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन) के मौजूदा मोनोग्राफ का संशोधन/उन्नयन करता है।
  2. जब भी हितधारकों/या विशेषज्ञों से पूछताछ/ सुझावों के आधार पर आवश्यकता होती है विभाग अशुद्धि और संशोधन सूची लाता है ।
  3. आईपीसी सचिवालय के रूप में कार्य करता है और मोनोग्राफ विकसित करता है और विपणन प्राधिकरण धारक (एम.ए.एच.), अन्य अंतरराष्ट्रीय भेषजसंहिता तथा आई.पी. के हितधारकों के साथ मिलकर काम करके प्रश्नों को हल करता है।
  4. भारतीय भेषजसंहिता के लिए नई पद्धतियों / उन्नयन की विधि का विकास एवं मान्यकरण।
  5. नए मोनोग्राफ की विधि का विकास एवं मान्यकरण तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन ।
  6. यूएसएपी, बीपी, ईपी, और अंतर्राष्ट्रीय भेषजसंहिता डब्ल्यूएचओ जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय भेषजसंहिता के साथ सहयोग / सामंजस्य गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है।
  7. भारत में औषधि विपणन की गुणवत्ता का आश्वासन देने के लिए नवीनतम तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार मोनोग्राफ एवं सामान्य अध्याय का उन्नयन ।
  8. भारतीय भेषजसंहिता के विकास और उन्नयन के लिए विभिन्न विशेषज्ञ कार्य समूहों की समन्वय बैठक।
  9. अनुसंधान गतिविधियों और परियोजनाओं में शामिल होकर अनुसंधान ज्ञान का प्रसार और एकीकरण।
  10. बीआईएस और डब्ल्यूएचओ (अंतर्राष्ट्रीय भेषजसंहिता) के विकास के तहत मानक पर समीक्षा और टिप्पणियां प्रदान करना ।
  11. जागरूकता पैदा करने और कौशल प्रदान करने के लिए फार्मा स्नातकों / स्नातकोत्तर / वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण प्रदान करना।

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